वीरभूमि बन रही जिंदगी देने वालों की नगरी
चित्तौडग़ढ़. शक्ति एवं भक्ति की नगरी चित्तौडग़ढ़ की अब जीवनदाताओं की नगरी यानि रक्तदाताओं की नगरी के रूप में पहचान बन रही है। रक्तदान महादान का संदेश यथार्थ के धरातल पर साकार हो रहा है। दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए खून देने की होड़ है। दिन हो या रात खून की जरूरत का संदेश मिलते ही रक्तदाता हाथ आगे बढ़ा स्वंय का खून दूसरों को देने के लिए तत्पर हो जाते है। कुछ वर्षो पहले अस्पताल के ब्लॅड बैंक में पूरे वर्ष में चार-पांच हजार यूनिट रक्त भी मुश्किल से आता था लेकिन अब १५ हजार यूनिट से भी अधिक खून एक वर्ष में एकत्रित हो रहा है। खास बात ये भी है कि अब सामान्य के साथ दुर्लभ रक्त ग्रुप का खून देने वालों की भी कमी शहर में नही रह गई है। दुर्लभ रक्तग्रुप के दाता अब दुर्लभ नहीं रह गए है। चित्तौडग़ढ़ जिले में आचार्र्यश्री तुलसी ब्लड फाउण्डेशन एवं विभिन्न सामाजिक व स्वंयसेवी रक्तदान की अलख जगा रहे है। सितम्बर वर्ष २०१४ में गठन के बाद फाउण्डेशन चित्तौडग़ढ़ के साथ राजस्थान सहित देश के विभिन्न जिलों में रक्तदान की मुहिम चला रहा हैॅ। फाउण्डेशन से सैकड़ो रक्तदाता जुड़ चुके है और संदेश मिलते ही सम्बन्धित अस्पताल में रक्तदान के लिए पहुंच जाते है। फाउण्डेशन के अध्यक्ष सुनील ढीलीवाल व अन्य पदाधिकारी रक्तदान के प्रति जागरूकता व भ्रांतियां दूर करने की मुहिम भी चला रहे है।
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एक वर्ष में मिला १५ हजार यूनिट से अधिक खून
चित्तौडग़ढ़ के जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक में वर्ष २०१८ में १५ हजार १२२ यूनिट रक्त जमा हुआ। ब्लड बैंक प्रभारी कमलाशंकर के अनुसार पिछले चार-पांच वर्ष से जिले में रक्तदान के प्रति पॉजिटव माहौल बना। इसके लिए प्रेरणा मिलने लगी तो खून देने की होड शुरू हो गई। रोगियों को मौके पर पहु्रंच रक्त उपलब्ध कराने से भी खून देने वालों की संख्या बढ़ी।
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आधी रात में भी खून देने के लिए रहते तैयार
एटीबीएफ ने रक्तदान के प्रति जो माहौल बनाया उसका सकारात्मक परिणाम है कि अब सामान्य व नेगेटिव ग्रुप के ऐसे कई रक्तदाता तैयार हो चुके है जो एक कॉल पर आधी रात भी रक्तदान के लिए तैयार रहते है। ऐसे रक्तदाताओं में राकेश बसवाल, दीपक कोठारी, विवेक अग्रवाल,विजय अजमेरा, अली असगर बोहरा, लक्ष्मण छीपा, ललित अन्छेरा, दिलीप वंगानी, रामेंद्र शर्मा, देवेन्द्र गुप्ता, मनीष शर्मा, सूर्यप्रभा शेखावत, भंवर सिंह, नारायण सोनी, लोकेश दर्जी आदि शामिल है। इन रक्तदाताओं ने जब भी किसी जरूरतमंद को रक्त की मांग हुई मौके पर पहुंच खून देने की तत्परता दिखाई। एटीबीएफ के पास ८६ रक्तदाता तो ऐसे है जो नेगेटिव ग्रुप के है और नियमित रक्तदान कर रहे है।
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कौन कर सकता रक्तदान
यदि आपकी उम्र 18 से 60 साल के बीच हैए आपका वजन 45 किलो से ऊपर है। आपका हीमोग्लोबिन 12.50 एमजी से ऊपर हो और किसी गंभीर बीमारी ग्रस्त ना हो तो आप हर तीन महीने में स्वेछिक रक्तदान कर सकते है। खून देने से 24 घंटे पहले से ही शराब, धूम्रपान और तम्बाकू का सेवन ना करें। खुद की मेडिकल जांच के बाद ही रक्तदान करें
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रक्तदान करने के फायदे
रक्तदान से खून का थक्का नहीं जमने से खून कुछ मात्रा में पतला हो जाता है और हार्ट अटैक का खतरा टल जाता है। खून का दान करने से वजन कम करने में मदद मिलती है। इसीलिए हर साल कम से कम 2 बार रक्तदान करना चाहिए। रक्तदान से शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है क्योंकि दान के बाद नए ब्लड सेल्स बनते हैं। रक्तदान से लीवर से जुड़ी समस्याओं में राहत के साथ कैंसर का खतरा भी कम हो जाता है।
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फोटो...........दिवाली की पूजा छोड़ पहुंच गर्ई खून देने
पिछले वर्ष दिवाली की पूजा की तैयारी थी कि सूचना आई कि अस्पताल में तीन माह की एक बेटी को रक्त की जरूरत है। सास-ससुर ने कहा कि पूजा बाद में कर लेंगे पहले रक्तदान करके आ जाओ। वर्ष २००४ में परिवार में किसी की रक्त की कमी से मृत्यु होते देख खून देने का जो संकल्प मन में लिया उसी का परिणाम है कि अब तक २७ बार ओ पॉजिटव ग्रुप का रक्तदान कर चुकी हूं। एटीबीएफ ने भी प्रोत्साहन दिया। मैं केसरिया जैन गुरूकूल स्कूल में पढ़ाती हूं तो कक्षा १२वीं की छात्राओं से यहीं कहती हूं की खून देने के लिए आगे आए। महिलाएं या बेटियां किसी से कम नहीं है। मेवाड़ विश्वविद्यालय में पढ़ाने वाले पति निखिल गर्ग भी रक्तदान के लिए हमेशा प्रेरित करते है।
नीरजा गर्ग, अध्यापिका, चित्तौडग़ढ़
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फोटो..........दुर्लभ रक्त ग्रुप काम आ रहा जिंदगिया बचाने में
मेरा रक्त ग्रुप ए नेगेटिव है जो दुर्लभ माना जाता है। मेरी सोच यहीं है कि दुर्लभ रक्त ग्रुप का लाभ तभी है जब इसका उपयोग किसी की जिंदगी बचाने में हो। जब भी मुझे महसूस हुआ कि किसी को मेरे रक्त ग्रुप की जरूरत है तो मैने रक्तदान किया। शरीर का खून किसी के जीवन में काम आए तो उसका महत्व है। एटीबीएफ से जुडऩे के बाद कई बार संकटग्रस्त व्यक्ति की सहायता के लिए रक्तदान का संदेश आया तो चिकित्सालय पहुंच गया। अब तक आठ बार रक्तदान कर चुका हूं। नेगेटिव ग्रुप होने से हमारे रक्त की मांग भी कम आती है। मेरा यहीं कहना है कि हम स्वयं भी रक्तदान करें और अपने आसपास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करेंं।
ललित अंछारा, नमकीन व्यवसायी, चित्तौैडग़ढ़
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