लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार कर सकती है इस योजना का एेलान, हर माह घर बैठे आएगी इतनी रकम

नर्इ दिल्ली। अगर केंद्र सरकार यूनिवर्सल बेसिक इनकम की योजना लाती है तो बहुत जल्द आपके खाते में सरकार पैसे देगी। अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि सरकार गरीबी रेखा के नीचे के लोगों को सब्सिडी की बजाय अब प्रति माह 2,500 रुपए की रकम देने पर विचार कर रही है। केंद्र सरकार के पहले इस योजना को सिक्किम राज्य में भी शुरू करने की बात की जा रही है। सिक्किम में सत्तारूढ़ पार्टी यानी डेमोक्रेटिक फ्रंट ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इस योजना को लेकर जनता से वादा भी किया है।

यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम काे लेकर भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर के कर्इ देशाें में भी में चर्चा हो चुकी है। बीते कुछ सालों में भारत में भी इसे लागू करने के लिए कर्इ बार बहस हो चुकी है। सरकाराें को इस योजना को लागू करने के पीछे दलील है कि इससे गरीबी को कम किया जा सकता है। उनका कहना है कि भारत के हर नागरिक को हर माह एक तय रकम मिलनी चाहिए। चाहें वो देश की आया में किसी तरह से योगदान दे रहा हो या नहीं।
इस स्कीम के तहत सरकार देश के हर नागरिक को प्रतिमाह एक तय रकम देगी, भले ही वह किसी प्रकार से देश के आर्थिक-सामाजिक, भौगोलिक सांचे में आता हो। इसके लिए उन्हें अपने आर्थिक हालात को साबित करने की जरूरत नहीं होगी। सरकार इस रकम को महंगार्इ दर के आधार पर तय करेगी। साथ ही अगर कोर्इ व्यक्ति इस योजना का फायदा उठाकर आमदनी का कोर्इ दूसर जरिया बनाता है तो सरकार उसपर टैक्स लगाकर इसके फायदे को नियंत्रण भी करेगी।इस स्कीम के तहत सरकार देश के हर नागरिक को प्रतिमाह एक तय रकम देगी, भले ही वह किसी प्रकार से देश के आर्थिक-सामाजिक, भौगोलिक सांचे में आता हो। इसके लिए उन्हें अपने आर्थिक हालात को साबित करने की जरूरत नहीं होगी। सरकार इस रकम को महंगार्इ दर के आधार पर तय करेगी। साथ ही अगर कोर्इ व्यक्ति इस योजना का फायदा उठाकर आमदनी का कोर्इ दूसर जरिया बनाता है तो सरकार उसपर टैक्स लगाकर इसके फायदे को नियंत्रण भी करेगी।
साल 2016-17 के आर्थिक सर्वेक्षण में भी इस योजना के बारे में बात की गर्इ थी। उस दौरान तत्कालीन आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने कहा था कि यह स्कीम बाकी सभी योजनाआें को रिप्लेस कर सकता है। उनका कहना था कि गरीबों के लिए कर्इ योजनाएं चलती हैं लेकिन उनतक सभी योजनाआें को पूरा लाभ नहीं मिल पाता।इस योजना को मध्य प्रदेश में भी कुछ समय के लिए पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया गया था। मध्य प्रदेश में सेल्फ एम्प्लाॅएड वुमन्स एसोसिएशन आैर यूनिसेफ ने जून 2011 से नवंबर 2012 तक लोगों को किसी शर्त के बिना ही पैसे दिए थे। इस योजना के बाद आर्थिक सर्वेक्षण में दावा किया गया था कि लोगों के पास पैसे आने से वो पहले से भी अधिक प्रोडक्टिव हुए हैं। एेसे में आगामी लोकसभी चुनाव से पहले सरकार इस स्कीम को लागू करने को लेकर गंभीर है। संभंव है कि देश कुछ जिलों में सरकार इस योजना को पाइलट प्रोजेक्ट के तौर पर घोषणा कर सकती हैै। Read theआपकी ढाणी

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