राजस्थान सरकार ने फिर बेरोजगारों को दिया बड़ा झटका, भर्तियों के नाम पर अभ्यर्थियों के साथ ऐसे खेल गई सरकार !

सरकारी लापरवाही प्रदेश के युवाओं पर भारी पड़ रही है। पिछली सरकार के समय निकाली 30 हजार से अधिक पदों की भर्तियों के पेंच सरकार अब तक नहीं सुलझा सकी है। ऐसे में युवाओं ने नई भर्तियों का सहारा ले लिया है। सीधी भर्तियों के कारण पंचायतीराज, मेडिकल, शिक्षा सहित अन्य महकमों में अब तक भर्ती नहीं हो चुकी है। हालांकि चुनावी साल में फिर सरकार ने इन महकमों में भर्तियों का दांव खेला है। खास बात यह है कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में इस बार भी सरकार ने सीधी भर्ती ही निकाली है। पुराने अनुभवों के देखते हुए युवा इसके विरोध में उतर आए है।

बोनस अंकों के कारण उलझी भर्ती

सीधी भर्तियों के विवाद की मुख्य वजह बोनस अंक रही। सरकारी महकमों में कार्यरत कार्मिकों को तो अनुभव के आधार पर दस से 30 अंकों का प्रावधान रखा गया। लेकिन निजी एजेन्सियों में कार्यरत कार्मिकों के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया। इस कारण निजी कार्मिक मामले को न्यायालय में ले गए।

भर्तियों ने कर दिया बेरोजगार विवादों की इन भर्तियों ने कई युवाओं को बेरोजगारी का झटका भी दिया। निजी कंपनियों में कार्यरत कई युवाओं ने सरकारी नौकरी की आस में निजी कंपनी का रोजगार भी छोड दिया। लेकिन चार वर्ष बाद भी सरकारी नौकरी नहीं मिलने पर युवाओं का सरकार से मोहभंग हो रहा है।
फिर भी नहीं बदला निर्णय

पिछली सरकार की गलतियों से भाजपा सरकार ने भी कोई सबक नहीं लिया। पिछली सरकार के समय में ’ज्यादातर महकमों में भर्ती का पैर्टन सीधी भर्ती कर दिया था। शिक्षक भर्ती भी जिला परिषदों के जरिए जिलास्तर की कर दी। ऐसे में युवाओं में सरकार के खिलाफ आक्रोश था। सरकार ने सुराज संकल्प यात्रा के दौरान शिक्षक भर्ती की एक ही परीक्षा का ऐलान किया था। इस कारण युवाओं ने भरपूर समर्थन भी दिया। इसके बाद भी सरकार सीधी भर्तियों के पेंच को नहीं सुलझा सकी।

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