मुंडन की प्रतिक्रिया दमन, लोकतंत्र में आत्मघाती कदम
- अध्यापक संवर्ग द्वारा विगत 13 जनवरी को भोपाल के जम्मुरी मैदान में आयोजित मुंडन आंदोलन जिसकी विधिवत सरकार को सूचना दी गई थी । यहां बहन शिल्पी सिवान ने चार महिला व अन्य सैकड़ों अध्यापकों ने मुंडन करवा कर अपनी शिक्षा विभाग में संविलियन व अन्य मांगों को प्रजातांत्रिक तरीके से रखा, जिसकी उम्मीदें स्वयं माननीय मुख्यमंत्री जी ने जगा रखी है । म.प्र. तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष कन्हैयालाल लक्षकार ने बताया कि अध्यापक मुंडन आंदोलन को सरकार ने अपनी छवी से जोड़ा व आंदोलन में शामिल अध्यापकों के खिलाफ दिनांक 19 जनवरी को अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश जारी किए । दमन की यह कार्रवाई अलोकतांत्रिक असंवैधानिक व आत्मघाती है । इतिहास गवाह है तमिलनाडु सरकार ने लगभग एक लाख पचहत्तर हजार कर्मचारियों को बर्खास्त किया था ,फलस्वरूप जयललिता को अपनी सरकार गवानी पड़ी थी । सत्ता परिवर्तन के साथ सभी कर्मचारियों को बहाल किया गया था । आश्चर्य व हैरान करने वाली बात यह है कि घोषित आंदोलन को रोकने में चूक सरकार से हुई । सरकार आंदोलन को अंजाम तक पहुंचने देने के दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बाजाय उल्टा आंदोलनकारी अध्यापकों के दमन पर उतारू हो गई जो अलोकतांत्रिक, असंवैधानिक व राजनीतिक रूप से असंवेदनशील, अपरिपक्व व आत्मघाती कदम सिध्द होगा । इस आंदोलन से प्रदेश ही नहीं देशभर के कर्मचारी आंदोलनों में अपना स्थान बनाया है । इससे कर्मचारी जगत में गहरी नाराजगी व्याप्त है । चुनावी वर्ष में सत्ताधारी दल को कर्मचारी जगत की मांगों को लेकर सहानुभूतिपूर्वक निर्णय लिया जाना चाहिए व आंदोलन रोकने में विफल दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कर सही दिशा में कार्रवाई की जाए व बातचीत का रास्ता अपनाया जाए ।
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